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केन्द्र प्रायोजित योजनाएँ


राज्य में कुल पाँच केन्द्र प्रायोजित योजनाएँ कार्यान्वित हैं जिसपर भारत सरकार के अंषदान के रूप में 1727 लाख रूपये प्राप्त होने है

मछुआरों के लिए सामुहिक जीवन दुर्घ टना बीमा:-
राष्टीय मछुआ कल्याण योजनान्तर्ग त राज्य के सक्रिय मछुआरों को बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। बीमित सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु अथवा स्थाई अपंगता की स्थिति में उनके आश्रित को 1.00 लाख रू0 एवं अस्थाई अपंगता की स्थिति में 50 हजार रू0 की राशि बीमा कम्पनी द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। प्रति सदस्य वार्षिक प्रिमियम 30 रू0 है, जिसका आधा-आधा व्यय भार क्रमशः राज्य एवं केन्द्र सरकार मिलकर वहन करती है। चालू वित्तीय वर्ष में 50,000 मछुआराों के बीमा कवरेज प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त गरीबी रेखा से नीचे की जिंदगी वसर करने वाले 24,000 मछुआरों के लिए जनश्री बीमा याोजना लागू की गयी है। दुर्घटना में किसी सदस्य की मुत्यु पर उनके आश्रित को 75 हजार रू0 एवं आंशिक रूप से अपंगता पर 35,500 रू0 बीमा कम्पनी द्वारा दी जाती है। सामान्य मृत्यु पर भी 30 हजार रू0 दिये जाते है। इसके लिए कुल राज्यांष के रूप में 20 लाख रूपये उपबंध प्राप्त है।

मछुआरों के लिए आवास एवं अन्य नागरिक सुविधाएँ:-
राष्टीय मछुआ कल्याण योजनान्तर्ग त मछुआरों के निजी जमीन पर आवास , पेयजल हेतु चापाकल लगाने की योजना है। जहाँ 75 से ज्यादा की संख्या में आवास निर्मित किये जाते है, वहाँ सामुदायिक प्रयोग के लिये एक सामुदायिक भवन का निर्माण भी कराया जाता है। प्रति आवास इकाई लागत 50,000 रू0 , चापाकल हेतु 15,000 रू0 एवं सामुदायिक भवन हेतु 1.75 लाख रू0 निर्धारित है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में मछुआ वाहूल्य राज्य के 17 जिलों में 2000 अदद आवास 114 चापाकल एवं 18 सामुदायिक भवन निर्माण की 1042.80 लाख रू0 की योजना स्वीकूति है। इस पर होने वाले व्यय का 50: 50: व्यय भार क्रमशः भारत एवं राज्य सरकारे मिलकर वहन करेगीं। भारत सरकार ने अपने अंषदान के रूप में प्रथम चरण में मात्र 285 लाख रूपये विमुक्त किये है। राज्य योजना मद से भी समतूल्य 285 लाख रूपये, कुल 570 लाख रूपये की लागत पर योजना कार्या न्वित है। चालु वित्तीय वर्ष में कुल 1500 लाख रूपये व्यय होंगे । भारत सरकार द्वारा गत वर्ष की अवषेष 285 लाख रूपये की राषि की विमुक्ति हेतु अनुरोध तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजा जा चुका है।

मत्स्य प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना:-
मत्स्य विकास कार्यक्रमों के प्रचार एवं प्रसार के लिये इस केन्द्र प्रायोजित योजनान्तर्ग त भारत सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत एवं राज्य सरकार का अंशदान 20 प्रतिशत वहन किया जाता है। इस योजनान्तर्गत एक प्रशिक्षण-सह-जागरूकता भवन का निर्माण एवं प्रशिक्षण हेतु दूश्य-श्रव्य (नकपव.टपेनंस) सामग्रियों से इसे सुसज्जित किया जाता है। इस प्रशिक्षण केन्द्र में विभागीय पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा मत्स्य पालकों को 15 दिनों का विशिष्ट प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय में प्रशिक्षण केन्द्र निर्मा ण की कुल 30 लाख रूपये की योजना स्वीकृत एवं प्रथम किष्त के रूप में 8 लाख रूपये की राषि विमुक्त है। भारत सरकार के अंषदान की शेष 16 लाख रूपये की विमुक्ति अनुरोध के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजा जा चुका है। राष्टीय कृषि विकास योजना अन्तर्ग त मधुवनी, दरभंगा, सीतामढी, भागलपुर, एवं गया में मत्स्य जागरूकता केन्द्र का निर्माण किया जा रहा है। सभी जगह जमीन उपलब्ध है केवल भागलपुर में पशुपालन प्रक्षेत्र की जमीन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना शेष है।

मत्स्य विपणन योजना:-
इस केन्द्र प्रायोजित योजनाअन्तर्ग त कुल व्यय का 75 प्रतिषत व्ययभार भारत सरकार एवं 25 प्रतिषत राज्य सरकार वहन करती है। मत्स्य विपणन गतिविधि को बढावा देने के उदेष्य से चालु वित्तीय वर्ष में 400 लाख रूपये का बजट उपबंध किया गया है जिसमें भारत सरकार का अंषदान 300 लाख रूपये है। इस राषि से इनसुलेटेड ऑटो, रफजरेड भान, ट्रक आदि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को अनुदान पर उपलब्ध कराया जायेगा। मुजफ्फरपुर एवं पटना में थोक मछली बाजार का विकास एवं गया, मधुवनी, नालंदा तथा समस्तीपुर में खुदरा मत्स्य बिक्री केन्द्र स्थापित किये जायेगें। योजना का कार्यान्वयन राष्टीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड के सहयोग से कार्यान्वत होगा।